होश और करुणा
बुद्ध कहते है: ‘करुणा तभी शुभ है जब यह जागरूकता का अनुगमन करती हो, नहीं तो यह शुभ नहीं है।होश…
“ होश आध्यात्म की अंतिम कीमिया है, बाकी सब विस्तार की बातें हैं “
बुद्ध कहते है: ‘करुणा तभी शुभ है जब यह जागरूकता का अनुगमन करती हो, नहीं तो यह शुभ नहीं है।होश…
~भौतिक शरीर से आरंभ करो और तब हर अगला कदम तुम्हारे लिए खुल जाता है। जब तुम पहले शरीर पर…
श्वास भीतर जाती है, तो आपको पता होता है। श्वास बाहर जाती है, तो आपको पता होता है। लेकिन एक…
~ संकल्प की साधना से ही सधता है होश । एकत्रित होती है होश की ऊर्जा। ~ प्रत्येक संकल्प को…
तुम दुखी हो,क्योंकि तुम्हारा मन दुखी है। तुम्हारा मन दुखी है,क्योंकि तुम्हारे मन में अनचाहे विचार चल रहे हैं। तुम्हारे…
पीनां च दुर्बलां शक्तिं ध्यात्वा द्वादशगोचरे।प्रविश्य हृदये ध्यायन् सुप्तः स्वातंत्र्यमाप्नुयात् ॥५५॥ पीनां च दुर्बलां शक्तिं ध्यात्वा द्वादश गोचरे। आपको पहले…
जब श्वास ‘हम्’ ध्वनि के साथ अन्दर आता और लय हो जाता है ,तो एक क्षणांश होता है जो पूर्ण…
जप का नियम है। अगर कोई भी जप शुरू करें—समझें कि राम—राम जप शुरू करते हैं, या ओम, कोई भी…
विकास के तीन चरण है-पहला: परिस्थिति मालिक है और तुम बस पीछे-पीछे घिसटते हो। तुम मानते हो कि तुम हो,…