योग निद्रा की सरल विधि
- आरामदायक बिस्तर पर पीठ के बल अर्थात छत की ओर चेहरा करते हुए लेट जाएं।
- आंखें बंद कर लें और अपने मन में चल रहे विचारों को ऐसे सुनें जैसे कि चिड़ियों के चहचहाने और कुत्तों के भौंकने जैसी बाहर की आवाजों को सुनते हैं।
- शुरुआत में कुछ क्षणों के लिए आप अपने विचारों के प्रति साक्षी भाव रखते हुए उन्हें सुन सकेंगे, किंतु कुछ ही क्षणों के बाद आप उनमें से किसी एक विचार से तादात्म्य कर लेंगे और होश रखना भूल जाएंगे। लेकिन इसकी चिंता नहीं करनी है और जब बेहोशी के कुछ पलों के बाद आपको याद आए कि आप बेहोश हो गए थे तो फिर से विचारों को साक्षी भाव से सुना शुरू कर दें।
- ऐसा करने के दौरान कई बार ऐसा होगा कि विचारों के प्रति आपका साक्षी भाव खो जाएगा और फिर अचानक पुनः लौट आएगा। इस प्रकार से विचारों के प्रति साक्षी रहने के दौरान होश के खोने और पाने का चक्र चलता रहेगा। इस दौरान होश के खोने के प्रति चिंतित ना हो क्योंकि जितनी बार होश खोएगा, उतनी बार आपका शरीर गहरी निद्रा में प्रवेश करने लगेगा। और जितनी बार होश वापस आएगा उतनी बार चेतना की तीव्रता बढ़ती जाएगी। और आप पाएंगे कि शरीर आपसे बहुत दूर सोया हुआ है और चेतना जगी हुई है। इस प्रकार शरीरभाव को कम करने के लिए बीच-बीच में होश का खोना जरूरी है ।
- जितनी देर तक यह अभ्यास किया जाएगा उतनी गहरी योग निद्रा की अवस्था प्राप्त होगी। और अभ्यास के बाद एक अलग ही गहरी नींद वाले आनंद का अनुभव होगा।
- विचारों को सुनने के अलावा अन्य विकल्प के रूप में अनाहत नाद सुना जा सकता है अथवा मोबाइल फोन पर कोई बार-बार रिपीट होने वाला मंत्र लगाकर सुना जा सकता है।
-Alertyogi
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